भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या केवल राम मंदिर के लिए ही नहीं, बल्कि अपने प्राचीन शिव मंदिरों के लिए भी प्रसिद्ध है। इन्हीं पवित्र स्थलों में से एक है क्षीरेश्वरनाथ महादेव मंदिर, जो श्रीराम जन्मभूमि के समीप स्थित है। सावन के पावन महीने में यहां रुद्राभिषेक और दुग्धाभिषेक के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
इस मंदिर का इतिहास रामायण काल से जुड़ा माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार राजा दशरथ ने संतान प्राप्ति की कामना से यहां भगवान शिव के शिवलिंग की स्थापना कर गाय के दूध से रुद्राभिषेक किया था। उनकी श्रद्धा और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें भगवान श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न जैसे चार दिव्य पुत्रों का आशीर्वाद प्रदान किया।
कहा जाता है कि उस समय भगवान शिव पर इतना दूध अर्पित किया गया कि वहां दूध का सागर (क्षीरसागर) बन गया। इसी कारण इस स्थान के भगवान शिव 'क्षीरेश्वरनाथ' के नाम से विख्यात हुए।
आज भी संतान सुख की कामना रखने वाले दंपत्ति यहां विशेष रूप से दुग्धाभिषेक करते हैं। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि सच्चे मन से पूजा और रुद्राभिषेक करने पर भगवान क्षीरेश्वरनाथ सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
क्षीरेश्वरनाथ महादेव मंदिर वैष्णव और शैव परंपराओं के अद्भुत संगम का प्रतीक माना जाता है और अयोध्या की समृद्ध आध्यात्मिक एवं धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है।


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